Disarmament in hindi. Nuclear disarmament की ताज़ा ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ in Hindi 2019-01-09

Disarmament in hindi Rating: 4,2/10 1052 reviews

Disarmament Meaning in Hindi, Definition of Disarmament in Hindi, OneIndia Hindi Dictionary

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Collapse of Negotiations and the Resumption of Tests —Pgs. दूसरा कारण: विभिन्न शक्ति के उग्र मतभेद थे । फ्रांस अन्तर्राष्ट्रीय सेना और सुरक्षा का दृढ़ समर्थक था । वह आरम्भ से ही राष्ट्र संघ की अध्यक्षता में अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लिए सेना के निर्माण का प्रस्ताव रख रहा था, क्योंकि इस प्रकार वह जर्मन आक्रमण से निश्चिन्त हो सकता था । इसके बाद ही वह अपने हथियार घटाने को तैयार था । उसका यह मत था कि सुरक्षा के बाद शस्त्रीकरण की आवश्यकता नहीं रहेगी, किन्तु ग्रेट ब्रिटेन का यह विचार था कि हथियारों की वृद्धि राष्ट्रों में असुरक्षा की भावना पैदा करती है, यदि हथियारों को घटा दिया जाये तो चिन्ता, असुरक्षा और आक्रमण की आशंका स्वयमेव कम हो जायेगी, हथियार जितने कम होंगे, युद्ध का भय उसी मात्रा में घट जायेगा । अत: सुरक्षा से पहले नि:शस्त्रीकरण आवश्यक है । फ्रांस की सुरक्षा की मांग जर्मनी की समानता की मांग से सर्वथा प्रतिकूल थी । इन दोनों का समन्वय असम्भव था और इनके संघर्ष की चट्टान से टकराकर सम्मेलन की नौका डूबनी शुरू हुई थी । c. In the Cold War, nuclear weapons took center stage. व्यापक आणविक परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि सी. के प्रस्तावित मसौदे पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया क्योंकि प्रस्तावित मसौदे में परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई प्रावधान नहीं रखा गया । भारत का दूसरा विरोध यह था कि यह सन्धि बहुत ही संकीर्ण है और यह केवल नए विस्फोट रोकने की बात करती है, पर नए तकनीकी विकास एवं नए परमाणु शस्त्रों के विषय में चुप है । सन्धि का स्वरूप परमाणु राष्ट्रों की तकनीकी उपलब्धता को बरकरार रखकर उनके हितों की रक्षा करने के लिए अधिक है न कि सपूर्ण निरस्त्रीकरण के लिए । इस सन्धि पर 24 सितम्बर, 1996 से हस्ताक्षर प्रारम्भ हुए थे । अब तक कुल मिलाकर 154 राष्ट्रों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं जिनमें से 45 ने इसका विधिवत् अनुमोदन भी कर दिया है । किन्तु सन्धि के प्रभावी होने के लिए विश्व के उन सभी 44 देशों द्वारा इसकी पुष्टि किया जाना आवश्यक है जिनके पास परमाणु शस्त्र अथवा परमाणु विद्युत् संयन्त्र अथवा परमाणु क्षमता उपलब्ध है । विविध परमाणु क्षमताओं वाले इन 44 राष्ट्रों में से अभी तक 26 ने ही सन्धि का अनुमोदन किया है, जबकि तीन देशों भारत, पाकिस्तान व उत्तर कोरिया ने इस पर अभी तक हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं । परमाणु शक्ति के रूप में घोषित पांच राष्ट्रों — अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस व चीन ने यद्यपि सी. International Control of Atomic Energy —Pgs. मध्यम दूरी प्रक्षेपास्त्र सन्धि, 8 दिसम्बर, 1987: राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाच्योव ने 8 दिसम्बर, 1987 को ऐतिहासिक मध्यम दूरी प्रक्षेपास्त्र सन्धि आई.

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वैश्विक निरस्त्रीकरण : एक विचारणीय विषय पर निबन्ध

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Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. Non-Proliferation of Nuclear Weapons Treaty N. जर्मनी तथा अन्य यूरोपीय देशों से विदेशी सेनाओं को हटाया जाये, v. Regional Treaties of Europe —Pgs. इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी ऐतिहासिक शिखर वार्ता का समापन हुआ जिससे एशिया प्रशांत क्षेत्र की भू - राजनीति नया आकार ले सकती है और क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है. Restructuring of the Negotiation Set-up —Pgs. निरस्त्रीकरण के मार्ग में बाधाएं और कठिनाइयां Difficulties in the Path of Disarmament : निरस्त्रीकरण की दिशा में किये गये प्रयासों में कोई चमत्कारिक सफलता नहीं मिली है । निरस्त्रीकरण के मार्ग में अनेक बाधाएं हैं, जो इस प्रकार हैं: A.

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Essay on Disarmament

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पनडुब्बियों का आकार 2,000 टन तथा तोपों का 5. Towards The Test-Ban Treaty —Pgs. Although, at present, India continues to express its support for any initiative that can lead up to the complete elimination of nuclear weapons, the factors that contributed to its strong support for nuclear disarmament are gradually evolving. बाह्य आकाश सन्धि, 1966: बाह्य आकाश सन्धि Outer Space Treaty भी शान्ति की दिशा में एक रचनात्मक सन्धि है । इस सन्धि द्वारा अमरीका, सोवियत संघ तथा ब्रिटेन ने बाह्य आकाश में न्यूक्लीय शस्त्रों का भेजा जाना निषिद्ध मान लिया । 20. Books to his credit are: Indo-Soviet Treaty: Reactions and reflections; Bangladesh: Crisis and consequences; Revoke Emergency; Four Decades in Parliament English and Hindi and Decisive days speeches by former Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee.

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Disarmament Meaning in Hindi, Definition of Disarmament in Hindi, OneIndia Hindi Dictionary

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To me, India is the exception. Spurred as of late by the United Nations, disarmament is a key issue in the world today and likely will continue as such in the future. अमरीका, सोवियत संघ और ब्रिटेन आणविक शस्त्रों का परित्याग करें, iii. It emphasizes a decrease in weapons and tools of war and usually has some kind of oversight for the process. प्राथमिकता का प्रश्न Priority of Disarmament or the Solution of Disputes : निरस्त्रीकरण पहले किया जाये अथवा राज्यों के आपसी विवादों को पहले सुलझाया जाये । निरस्त्रीकरण हो जाये तो कई राजनीतिक विवाद स्वयं सुलझ जायेंगे और राजनीतिक विवाद सुलझ जायें तो निरस्त्रीकरण करना सुगम हो जायेगा । हमारी मूल समस्या यह है कि दोनों में से किस तर्क को ज्यादा वजनी मानें । हमारी धारणा यह है कि शस्त्रों की होड़ से तनाव, शंका, भय और युद्ध का सूत्रपात होता है अत: निरस्त्रीकरण को प्राथमिकता देनी होगी । B. But the gradual integration of India within the global nuclear architecture, while it is allowed to retain its weapons, will surely address its complaints on the architecture being discriminatory.

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वैश्विक निरस्त्रीकरण : एक विचारणीय विषय पर निबन्ध

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Measures to Prevent Spread of Nuclear Weapons —Pgs. Treaty for Nuclear Free Zone in Latin America —Pgs. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. हवाई अस्त्रों को अश्व-शक्ति के आधार पर नियन्त्रित किया जाये । vi. General Assembly Session of 1962 —Pgs. अक्टूबर, 1924 में अस्थायी मिश्रित आयोग द्वारा काम करना बन्द कर दिया गया और इसके स्थान पर नि:शस्त्रीकरण सम्मेलन के लिए सज्जीकरण आयोग Preparatory Commission for the Disarmament Conference बनाया गया और इसके सदस्य कौंसिल में विद्यमान राज्यों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त संघ के कुछ अन्य सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि थे तथा संघ का सदस्य न होते हुए भी सं. D in International Relations from the School of International Studies, The American University, Washington D.

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परमाणु अस्त्रविहीन राष्ट्र परमाणु बम बनाने का अधिकार त्याग देंगे । D. जवाहरलाल नेहरू का निधन, रूस के प्रधानमंत्री खुश्चेव का पतन तथा उसके तुरंत बाद चीन द्वारा अणु बम विस्फोट से हमारे समक्ष विकट समस्याएँ आ खड़ी हुईं । इनके अतिरिक्त वियतनाम के संघर्ष में अमेरिका का पूर्ण रूप से हस्तक्षेप, दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया-हिंदेशिया का टकराव, श्रीलंका की भंडारनायके सरकार का पतन, तदुपरांत हिंदेशिया का राष्ट्र संघ से अलगाव-ये सब ऐसी घटनाएँ रहीं, जिनके कारण संपूर्ण विश्व का राजनीतिक संव्यूहन ही आदोलित हो उठा था । इनके चलते अंतरराष्ट्रीय संपर्कों में अनिश्चितता का जो दौर आया, वह वर्तमान तथा भावी वर्षों में, संसार का भाग्य निश्चित करनेवालों के लिए चिंता का विषय बन गया । संसार के समक्ष रूस-अमेरिका विवाद, भारत-चीन सीमा विवाद, भारत-पाकिस्तान विवाद, उत्तर कोरिया और ईरान परमाणु विवाद, इसक-सुयंक्त राज्य अमेरिका विवाद आदि कुछ ऐसी चिंतनीय समस्याएँ चली आ रही हैं, जिनसे कभी और कही भी विश्वव्यापी युद्ध के विस्तार की आशंका बनी रहती है । चीन की विस्तारवादी नीति ने चौतरफा आक्रमण कर अपना साम्राज्य विस्तार करने का जो अंतरराष्ट्रीय कुचक्र चलाया था, उसमें उसे भी विफलता मिली है । दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को अपने परमाणविक विस्फोट द्वारा आतंकित करने पर भी वह संभवत: अपने कुटिल चक्र में सफल नहीं हुआ । हिंदेशिया की क्रांति तथा चीनी तत्त्वों की समाप्ति से चीन की प्रतिष्ठा को न केवल गहरी चोट लगी है, बल्कि उसके विस्तार का स्वप्न भी भंग हो गया है । अब चीन की स्थिति यह है कि वह गंभीर रूप से अपने आतरिक सैद्धांतिक विरोधों-अंतर्विरोधों में उलझकर रह गया है । इधर, अमेरिका और चीन में सैद्धांतिक विरोध निरंतर उग्र होता जा रहा है । ईरान-इराक के बीच में जो कुत्सित युद्ध की निरंतरता बनी हुई है, उसमें चीन और अमेरिका मुख्य कारक हैं । खुले रूप में चीन ईरान की मदद कर रहा है । कुछ वर्षो पूर्व ईरान ने चीन के साथ १. Nuclear Free Zone Treaties —Pgs. Yes, it would still be discriminatory but will not be against Indian interests. पर 182 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं एवं 156 देशों ने इसका पुष्टिकरण किया है । परमाणु अप्रसार सन्धि समीक्षा सम्मेलन: अप्रैल-मई, 2000 में सम्पन्न परमाणु अप्रसार सन्धि समीक्षा सम्मेलन में पांच परमाणु सम्पन्न शक्तियां अपने परमाणु आयुध भण्डारों को पूरी तरह समाप्त करने पर राजी हो गईं, हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है । 2 मई, 2005 को न्यूयॉर्क में सम्पन्न परमाणु अप्रसार समीक्षा सम्मेलन में 190 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । सम्मेलन में ईरान के विदेश मन्त्री कमाल खराजी परमाणु अप्रसार सन्धि के उस प्रावधान पर अड़े रहे जिसके अन्तर्गत ईरान सहित 182 देशों ने परमाणु हथियार नष्ट कर दिए थे, जबकि अमरीका और अन्य कुछ देश नए मानदण्ड निर्धारित करते हुए एक बार फिर से विचार करने के पक्षधर थे । एन. पांच महाशक्तियों ने 1936 तक नये युद्धपोत न बनाने का निश्चय किया । ii.

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वैश्विक निरस्त्रीकरण : एक विचारणीय विषय पर निबन्ध

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The various nuances of disarmament — establishment of negotiations, machinery, suspension of nuclear tests, proliferation of nuclear weapons, establishment of nuclear-free zones, reduction of nuclear and conventional weapons, international control of atomic energy and establishment of international police force — have been studied minutely in the book. Following , that waiver in effect captured an informal acceptance of India as a nuclear weapon state. Information provided about Disarmament: Disarmament meaning in Hindi : Get meaning and translation of Disarmament in Hindi language with grammar,antonyms,synonyms and sentence usages. His research interests include nuclear deterrence, coercion, and South Asian stability at the nuclear, conventional and subconventional levels of conflict. रूसी उपग्रहों को नष्ट करना, २. पहली धारा में तीन राष्ट्रों द्वारा यह संकल्प किया गया कि वे अपने अधिकार क्षेत्र और नियन्त्रण में विद्यमान किसी भी प्रदेश के वायुमण्डल में, इसकी सीमाओं में, बाह्य अन्तरिक्ष में, प्रादेशिक अथवा महासमुद्रों में कोई भी आणविक विस्फोट नहीं करेंगे । b. अमरीका ने जापान की समानता की मांग का घोर विरोध किया । उसका यह कहना था कि अमरीका को प्रशान्त एवं अटलाण्टिक महासागरों के तटों की रक्षा करनी है, जबकि जापान के पास केवल प्रशान्त महासागर ही है, अत: उनकी नौसेना से समानता नहीं हो सकती । इन मतभेदों को हल करने के लिए लन्दन में दिसम्बर, 1935 को सं.

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संयुक्त राष्ट्र संघ की पहली महासभा ने संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा आयोग United Nations Atomic Energy Commission की स्थापना की जिसके सदस्यों में सुरक्षा परिषद् के सभी राष्ट्रों के साथ-साथ कनाडा भी था । परमाणु ऊर्जा आयोग की पहली बैठक में अमरीका ने एक राष्ट्रीय परमाणु विकास प्राधिकरण के लिए बरूख योजना एचेसन-लिलिएंथल पेश की । इस योजना के अनुसार परमाणु ऊर्जा आयोग को विखण्डनीय पदार्थों के उत्पाद की सब अवस्थाओं का निरन्तर निरीक्षण करना था और उसे परमाणु अस्त्रों के परीक्षण करने का और परमाणु ऊर्जा के शान्तिकालीन लाभों को बढ़ावा देने का अनन्य अधिकार दिया गया । सोवियत संघ ने बरूख योजना के निरीक्षण सम्बन्धी और खानों तथा फैक्टरियों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वामित्व और प्रबन्ध सम्बन्धी उपबन्धों पर आपत्ति की । 4. Disarmament: Reduction and Elimination —Pgs. पहला कारण: इसमें सहयोग की भावना का अभाव और इसका राजनीतिक होना बताया है । इसमें विभिन्न राष्ट्र विश्व-शान्ति की समस्या सुलझाने के लिए नहीं, किन्तु अपनी प्रभुता बनाये रखने और दूसरों की शक्ति न बढ़ने देने के लिए एकत्र हुए थे । b. परमाणु अस्त्रों के परीक्षण और विस्फोटों पर रोक लगाने की अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए । E. उपर्युक्त प्रस्ताव को मुख्य आधार बनाकर इस समस्या पर विचार करने के लिए राष्ट्र संघ का निरस्त्रीकरण सम्मेलन जेनेवा में 3 फरवरी, 1932 को आर्थर हैण्डर्सन के सभापतित्व में आरम्भ हुआ । इसमें 57 राज्यों से प्रतिनिधि आये थे । यह विधि की विडम्बना और क्रूर व्यंग्य था कि इस समय शंघाई में जापान की चीन के विरुद्ध लड़ाई चल रही थी । इस सम्मेलन के 232 प्रतिनिधि अपने साथ 337 प्रस्ताव लेकर आये थे । फ्रेंच प्रतिनिधि आन्द्रे तरद्यु ने इसे सफल बनाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय पुलिस की एक निरोधात्मक तथा दण्डात्मक सेना बनाने का प्रस्ताव रखा । इसके अनुसार विभिन्न राज्यों को सब आक्रमणात्मक शस्त्र और साधन — बड़े युद्धपोत, तोपखाने, पनडुब्बियां, बमवर्षक वायुयान संघ को दे देने चाहिए, सब विवादों का निर्णय आवश्यक रूप से मध्यस्थों द्वारा ही होना चाहिए । जर्मनी ने इससे यह मांग की कि राष्ट्र संघ के प्रतिज्ञा-पत्र — वर्साय की सन्धि में उसके साथ किया गया वचन पूरा होना चाहिए, उसका नि:शस्त्रीकरण इस आधार पर किया गया था कि अन्य देशों के शस्त्रास्त्र भी कम कर दिये जायेंगे । अब या तो दूसरे देशों के हथियार कम कर दिये जायें अथवा जर्मनी को अन्य देशों के बराबर शस्त्रास्त्र रखने दिये जायें, किन्तु फ्रांस जर्मनी की इस समानता की मांग को स्वीकार करने का कट्टर विरोधी था, वह अपनी सुरक्षा की दृष्टि से जर्मनी के निःशस्त्रीकरण को स्थायी बनाना चाहता था । फ्रांस और जर्मनी के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण से सम्मेलन में गतिरोध उत्पन्न हो गया । हिटलर के अभ्युदय के बाद 14 अक्टूबर, 1933 को जर्मनी ने नि:शस्त्रीकरण सम्मेलन से पृथक् होने की घोषणा की । इससे यह सम्मेलन, क्रियात्मक रूप से समाप्त और मृतप्राय हो गया, यद्यपि इसकी अन्तिम बैठक 29 मई, 1933 को हुई । सर अल्फ्रेड जिम्मर्न के सम्मेलन की विफलता के कारण: a. निरस्त्रीकरण से बैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति का अवरुद्ध होना: ऐसा भी कहा जाता है कि निरस्त्रीकरण से तकनीकी और वैज्ञानिक उन्नति की गति मन्द पड़ जायेगी । आज विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जितनी भी उन्नति हुई है उसका मूल कारण राष्ट्रीय सुरक्षा की चिन्ताएं और शस्त्र निर्माण के क्षेत्र में होने वाले अनुसन्धान हैं । Essay 4. Non-Proliferation of Nuclear Weapons —Pgs.

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Nuclear disarmament की ताज़ा ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ in Hindi

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Resumption of Negotiations and Problems —Pgs. रासायनिक हथियार निषेध 13 जनवरी, 1993 : रासायनिक हथियारों के विकास, उनका निर्माण, भण्डारण एवं उनके प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगाने से सम्बन्धित सन्धि 29 अप्रैल, 1997 से लागू हो गई है । इस सम्बन्ध में 13 अप्रैल, 1993 को पेरिस में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसमें 160 देशों की सहमति थी । लेकिन इसे लागू करने के लिए कम-से-कम 65 देशों द्वारा इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी था । 65 देशों के अनुमोदन के बाद इस सन्धि के कानूनी रूप लेने की अवधि 180 दिन थी । इस हिसाब से यह 29 अप्रैल, 1997 से प्रभावी हो गई है । इस सन्धि के मसौदे में रासायनिक हथियारों के लिए अनुसन्धान, उनका विकास, उनका भण्डारण एवं उनके हस्तान्तरण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का प्रावधान रखा गया है । मसौदे में सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों से आशा की गई है कि वे 1 से 15 वर्ष के बीच अपने-अपने रासायनिक हथियारों के जखीरे नष्ट कर देंगे । रासायनिक हथियारों पर नियन्त्रण के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था बनाई गई है । इस संस्था का मुख्यालय हेग में है । रासायनिक हथियारों के विनाश की दिशा में विश्वस्तर पर किए गए इन प्रयासों को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया, लेकिन अमरीका एवं रूस के बिना यह सन्धि काफी हद तक खोखली सिद्ध होगी,, क्योंकि इन हथियारों पर पाबन्दी लगाने वाले 65 देशों में अमरीका व रूस शामिल नहीं हैं । अमरीका एवं रूस की तरह के कई देश ऐसे हैं जिन्होंने इस सन्धि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और ये देश चोरी-छिपे रासायनिक हथियारों के विकास एवं उत्पादन में लगे हुए हैं । ऐसे देशों में लीबिया, सीरिया तथा उत्तरी कोरिया प्रमुख हैं । 31. Consequentially, this will require India to reconsider its position on nuclear disarmament, a task that New Delhi continues to evade for now. The African Free Zone Treaty —Pgs. Ultimately, the main purpose of disarmament is world peace and the survival of mankind. संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर की दूसरी धारा में नि:शस्त्रीकरण की चर्चा की गयी है । चार्टर में नि:शस्त्रीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी महासभा और सुरक्षा परिषद् दोनों पर डाली गयी थी । 2.

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