Raja story in hindi. Raja Parikshit and Kalyug story in hindi 2019-03-04

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दया के मूर्तिमान स्वरूप महाराज रन्तिदेव

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जल्दी ही इसके आगे की में publish करेंगे. बड़ी रानी को बंदी गृह में डाल दिया गया और उपचार के नाम पर तरह तरह की यातनाये दी जाने लगी. मैं फिर तुझे कोई स्थान अवश्य दूंगा। इस पर कलयुग थोड़ा खुश हुआ और बोला हे महात्मन! However, you can change your cookie settings at any time. दूसरे देश की राजकुमारी उसकी बुद्धिमानी पर हमेशा शक करती थी और उसकी नए नए तरीके से परीक्षा लेती रहती थी लेकिन राजा हर परीक्षा में पास होता था और अपने दरबारियों को यह साबित कर देता था कि वह एक योग्य राजा है एक दिन राजकुमारी राजा की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने के लिए आई उसने तो अपने दोनों हाथों में फूल फूलों की माला ली एक फूल की माला असली थी और दूसरी कागज के फूलों की थी पर दोनों देखने में एक असली लगती थी उन्हें कोई भी देख कर यह नहीं बता सकता था कि राजा भी जब अपनी आंखों से देख देख कर परेशान हो गया तो उसने अपने सेवक को आदेश दिया कि वह बगीचे वाली खिड़की खोल दे जब सेवक ने बगीचे की खिड़की खोल दी तो बगीचे में से मधुमक्खियां असली फूलों की माला की तरफ आने लगी और राजा ने बता दिया कि यह असली फूलों की माला है राजकुमार यह देख कर हैरान हो गई और बोली सच में राजा आप बुद्धिमान और होशियार है आपने बता दिया कि मधुमक्खी असली फूल के पास आएंगे वही असली है क्योंकि मधुमक्खी नकली फूलों पर कभी नहीं बैठती raja rani story, raja ki kahani, राजा के दरबार में बैठे सारे दरबारी राजा की बुद्धिमानी की प्रशंसा करने लगे और सब कहने लगे हमें भी राजा की तरह चतुर और बुद्धिमान होना चाहिए अभी हम संकट से बाहर निकल सकते हैं और अपने राज्य के सेवकों की सुरक्षा कर सकते हैं अगर आपके पास भी ऐसी ही कहानी है तो आप हमे भेज सकते है हम आपकी कहानी बहुत जल्द यहां पर प्रकाशित करेंगे भूतों से जुडी कहानी यहां पर पढ़े:-. वे राजा विक्रमादित्य से काफी प्रभावित हुए थे और कइयो ने तो उन्हें अपना आदर्श भी मान लिया था. पहले से ही विपत्ति झेलती हुई तारामती पर यह दुःख वज्र की भांति आ गिरा. इनकी पत्नी का नाम तारामती तथा पुत्र का नाम रोहिताश्व था.

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Raja Parikshit and Kalyug story in hindi

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हरिश्चन्द्र इकक्षवाकू वंश के प्रसिद्ध राजा थे. साधू द्वारा राजा के बच्चों को शिक्षा Education to Kids राजा के दोनों बच्चों को साधू ने अब अस्त्र-शस्त्र चलाने के साथ ही साथ शास्त्रों का ज्ञान भी देना शुरू कर दिया. In Rangeela Raja, Govinda will be seen in a double role; who is having four distinct characters. राजा अपनी रानी व पुत्र से अलग हो गये. उन्होंने अपने कार्य में कभी भी कोई त्रुटी नहीं होने दी. बहुत जमाने पहले की बात है। राजा हरिश्चंद्र सच बोलने और वचन. राजा हरिश्चंद्र ने इस वर के बदले अपने बच्चे की जान वापिस मांग ली तभी राजा हरिश्चंद्र का बच्चा उठ खड़ा हुआ और भगवान ने राजा हरिश्चंद्र के सत्य के मार्ग पर चलने के कारण उन्हें अपना राज्य और बीवी,बच्चे वापस दिलवा दिए और इस तरह से राजा हरिश्चंद्र सत्य के न्याय के लिए फिर से राजा बने और हमारे देश का नाम उज्जवल किया इस तरह से हम कह सकते हैं कि राजा हरिश्चंद्र वाकई में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र थे वह किसी भी परिस्थिति में सत्य के मार्ग को नहीं छोड़ते थे,वो सत्यवादी थे हमको भी उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है और जीवन में कुछ अच्छा करने की जरूरत है.

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चार आने का हिसाब Prernadayak Hindi Kahani

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शकुन्तला दुष्यन्त की याद में इतना अधिक खोई हुई थी कि उसे दुर्वासा ऋषि के आने का पता ही नहीं चला. उनके साथ पुत्र रोहिताश्व भी रहता था. सायंकाल तक राजा को शमशान घाट के मालिक डोम ने ख़रीदा. उनके अनुनय — विनय करने पर तथा उनकी बातो से वे रानी तथा अपने पुत्र को पहचान गये, किन्तु उन्होंने नियमो में ढील नहीं दी. To know the value of life with fun in the way of story's. महान विक्रमादित्य के पराक्रमो को प्राचीन काल में ब्रिहत्कथा कर गुनाध्या में बताया गया है.

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अहंकारी राजा Ahankaari Raja Moral Story in Hindi

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उन दिनों मनुष्यों को पशुओ की भांति बेचा — ख़रीदा जाता था. अन्य Hindi Kahaniya भी पढ़े — Another Raja Rani ki Kahani in Hindi: समय बीतता गया और बड़ी रानी गर्भवती हो गयी संपूर्ण राज्य में खबर फ़ैल गयी राज्य वैध को निर्धारित किया गया जिससे रानी का उचित उपचार होता रहे और देखभाल के लिए राजा ने अपने सबसे खास मंत्री की पत्नी को रानी की देख रेख के लिए सुन्चित किया. पैसों के मामलों में हम कहीं न कहीं गलती कर रहे हैं , लाइफ को बैलेंस्ड बनाना ज़रूरी है और इसके लिए हमें अपनी आमदनी और उसके इस्तेमाल पर ज़रूर गौर करना चाहिए, नहीं तो भले हम लाखों रूपये कमा लें पर फिर भी प्रसन्न एवं संतुष्ट नहीं रह पाएंगे! वह न किसी से बात करती थी नहीं सही से खाती पीती थी. सब लोगो की रजामंदी से साधू वही रहने लगे और मंदिर की देख-रेख, आरती और पूजा का कार्य भी करने लगे. यह Ek Raja ki Kahani है. विक्रम संवत में विक्रमादित्य के पराक्रमो के आस-पास के शासक भी चीर परिचित थे.

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Raja Rani ki Kahani in Hindi

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इस व्यवस्था में दस वर्ष में हुई फसल की पैदावार तथा उत्पादन-लागत का सावधानी पूर्वक सर्वेक्षण किया जाता था. उसकी हालत पागलो जैसी होगई थी. इसके साथ ही वे विक्रम, बिक्रमजीत और विक्रमरका के नाम से भी जाने जाते थे. खाने के नाम पर उन्हें चोकर की रोटी और नारियल के खोपरे में पानी दिया जाता था. राजा ने मंत्री से दक्षिणा देने हेतु राजकोष से मुद्रा लाने को कहा. अँगूठी देखते ही उनको विवाह की याद ताजा हो गयी. महर्षि विश्वामित्र ने हरिश्चन्द्र के सत्य की परीक्षा लेने का निश्चय किया.

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राजा भोज और सत्य Raja Bhoj Story in Hindi

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ऐसा माना जाता है की गुप्त वंश आने के पहले विक्रमादित्य ने ही भारत पर राज किया था. आप हमसे पर भी जुड़ सकते है. विक्रमादित्य के महानता और उनके पराक्रम की 150 से भी ज्यादा कहानिया है, जग प्रसिद्ध बैताल पचीसी और सिंघासन बत्तीसी भी शामिल है. वे एक आदर्श राजा के नाम से जाने जाते थे, इतिहास में वे अपनी ताकत, हिम्मत और विद्वान नीतियों के लिये जाने जाते थे. Also read सन्यासी का राजा रानी को आशीर्वाद — Sanyasi ka Raja Rani ko Ashirvad एक दिन राजा अपनी बड़ी रानी के साथ वन विहार को गए थे वह उन्हें एक सन्यासी मिले.

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Raja Parikshit and Kalyug story in hindi

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प्रशिक्षण पूरा होने पर दोनों भाई बहिन एक अच्छे योद्धा बन गए. राजमहल कोष सब आपका हो गया. हालाँकि इसका उद्देश बाद में 12 वी शताब्दियों में किया गया था. परीक्षित बोले की आपके अंदर केवल और केवल अवगुण है अगर एक भी गुण तेरे अंदर है तो बता? Yehan ke log yeh kahte hain ki bharatvarsh me keval yehi ek sthan hai jahan bhagwn ne do bar avtar liya hai. किसी को किसी चीज़ की कमी नहीं थी. यह भी पढ़े : हरिश्चन्द्र विश्वामित्र की बातें सुनकर दुखी हो गये.

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चार आने का हिसाब Prernadayak Hindi Kahani

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इसी समय पुत्र का शव लिए रानी भी शमशान पर पहुंची. निराश शकुन्तला को उसकी माँ मेनका अप्सरा ने कश्यप ऋषि के आश्रम में रखा. He was the ruler of Ayodhya. दोस्तों अगर आपको हमारी आज की ये कहानी satyavadi raja harishchandra story in hindi पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें और हमारा फेसबुक पेज लाइक करना न भूले और हमें कमेंट्स के जरिए बताएं कि आपको हमारा ये आर्टिकल Satyavadi raja harishchandra ki katha कैसा लगा अगर आप चाहे हमारी अगली पोस्ट को सीधे अपने ईमेल पर पाना तो हमें सब्सक्राइब जरूर करें. तुम सब कुछ जानकार भी मुझ से मेरे दुःख का कारण पूछते हो! और आगे चलने पर उन्हें नदी के किनारे एक मंदिर में शंख और घड़ियाल बजने की आवाज सुनाई दी.

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Raja Rani ki Kahani in Hindi

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छोटी रानी दासी — Chhoti Rani ki Daasi छोटी रानी के एक दासी थी जो जादू टोना करना जानती थी और कई लोगो पर उसने इसका प्रयोग करके उनको बर्बाद किया था. दासी यह चाहती थी की छोटी रानी के किसी तरह से एक संतान हो जाये जिससे वह राज्य की महारानी बन जाये. इसके पिछले भाग में आपने राजा और उसकी दो रानियों की कहानी Story of king and queen पढ़ी थी उसी कहानी के भाग -२ को हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है- अगर आपने अभी तक कहानी का भाग -१ नहीं पढ़ा है तो आप कहानी — पढ़े. भरत बचपन से ही वीर और साहसी था. चक्रवती सम्राट भरत ने राज्य में सुदृढ़ न्याय व्यवस्था और सामाजिक एकता सदभावना स्थापित की. The story was penned by the director with the support of Ranchhodbai Udayram.

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Raja Todarmal History Hindi (राजा टोडरमल का इतिहास का जीवनी, जीवन परिचय)

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उससे कोई मुक्त नहीं हो सकता. उनके दोनों पुत्र धारी और कल्याण दास भी अकबर के दरबार में ही थे. ध्यान देने पर उन्होंने पहचान कि स्वप्न में जिस ब्राह्मण को उन्होंने राज्य दान किया था वे महर्षि विश्वामित्र ही थे. विश्वामित्र जी ने इसी के साथ राजा हरिश्चंद्र से कुछ मुद्राएं भी मांगी तो राजा विश्वामित्र को मुद्राएं देने के लिए राजी हुए लेकिन विश्वामित्र ने कहा कि तुमने मुझे राज्य के साथ में सब कुछ यानी धन,हीरे जवाहरात सभी मुझे दान में दे दिए है अब तुम्हारे पास मुझे मुद्राए देने के लिए नहीं है अब तुम क्या करोगे तभी राजा हरिश्चंद्र ने उस विश्वामित्र ऋषि के मांगने पर अपनी बीवी बच्चों को ऋषि विश्वामित्र के हवाले कर दिया लेकिन उससे भी उस ऋषि की मांग पूरी न हो सकी उसमें भी कुछ मुद्राएं कम पड़ रही थी उसके बाद राजा हरिश्चंद्र ने अपने आपको भी इस ऋषि को सौंप दिया कि आज से मैं आपका गुलाम हूं इस तरह से राजा हरिश्चंद्र ने अपने आपको उस ऋषि को सौप दिया और एक गुलाम बन चुके थे अब वह अपना सब कुछ खो चुके थे. राजा को हमेशा उचित सलाह देती थी. भरत ने अपना और अपनी माँ का नाम बता दिया.

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